मरीजों के लिए खतरे का सबब बने निजी अस्पतालों पर चला स्वास्थ्य और अग्निशमन विभाग का चाबुक, कई सील
कथनी_करनी_न्यूज
बाराबंकी। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में इंसानी जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले निजी अस्पतालों और सेंटरों के खिलाफ प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मरीजों और तीमारदारों की जान को जोखिम से बचाने के लिए गठित विशेष टास्क फोर्स ने बुधवार को जिले के एक दर्जन से अधिक अस्पतालों पर औचक छापेमारी की, जिससे अवैध संचालकों में हड़कंप मच गया। यह बड़ी कार्रवाई मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के नोडल अधिकारी लव भूषण गुप्ता के नेतृत्व में की गई। इस संयुक्त टीम में अग्निशमन विभाग के अधिकारी, डॉ. संजय बाबू कुरील और चिकित्सा पंजीकरण पटल सहायक जितेंद्र कुमार शुक्ला सहित भारी पुलिस बल और स्टाफ शामिल रहा।
टास्क फोर्स ने बाराबंकी के मुख्य मार्गों से लेकर ग्रामीण, शहरी और गली-मोहल्लों में संचालित निजी अस्पतालों पर एक साथ धावा बोला। जांच के दौरान बालाजी अमृता हॉस्पिटल में नियमों की जमकर धज्जियां उड़ती पाई गईं। यहाँ न तो आपातकालीन निकास द्वार की व्यवस्था थी और न ही फायर सेफ्टी उपकरण क्रियाशील मिले। इन गंभीर खामियों के चलते टीम ने तत्काल अस्पताल के बेसमेंट को सील कर दिया। वहीं, छापेमारी के दौरान अनन्या हॉस्पिटल बंद पाया गया। टास्क फोर्स ने मुस्तैदी दिखाते हुए अस्पताल के प्रबंधक से फोन पर संपर्क किया और बेसमेंट को सील करने का नोटिस जारी कर दिया।
कार्रवाई के दौरान सबसे चौंकाने वाला मामला देवा क्षेत्र से सामने आया। यहाँ सरस्वती मेडिकल स्टोर के पीछे छिपकर, बिना किसी वैध अनुमति के मरीजों का इलाज किया जा रहा था। टास्क फोर्स ने यहाँ अवैध रूप से मरीजों का उपचार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाज वाले पूरे प्रांगण (परिसर) को सील कर दिया है। मानकों की अनदेखी और कागजी कमियां मिलने पर टास्क फोर्स ने नेलसन हॉस्पिटल चिल्ड्रेन हॉस्पिटल, विधांश हॉस्पिटल, देवा डायग्नोस्टिक एंड मेडिकल सेंटर और विधान पॉलीक्लिनिक इन पांच संस्थानों को पांच दिवसीय नोटिस थमाया है।
टीम को देखकर शटर गिराकर भागे संचालक








