रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का आह्वान

 

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का आह्वान

 

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसान संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

 

जिला कृषि अधिकारी राजितराम वर्मा की अध्यक्षता में जुटे कृषि विशेषज्ञ और किसान

 

कथनी_करनी_न्यूज
बाराबंकी। किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने एवं इसके लाभों की जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से जनपद में एक विशेष किसान संवाद एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों तथा प्रबंधन प्रतिनिधियों ने मुख्य रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कृषि अधिकारी राजितराम वर्मा ने की। इस अवसर पर अनुराग सक्सेना (सीनियर जीएम), अशोक सिंह (सीनियर मैनेजर), संजय सिन्हा (सीएडी टीम) सहित सुमित दुर्गा पाल (मैनेजर), भास्कर कुमार (मैनेजर) तथा तन्मय कृष्णा (मैनेजर) विशेष रूप से उपस्थित रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता अनुराग सक्सेना ने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत को कम करती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों की आय में वृद्धि करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की विभिन्न आधुनिक तकनीकों, जैसे- फॉम, लफॉम और प्रोम (PROM) के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री प्राप्त होती है।सीनियर मैनेजर अशोक सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बाराबंकी जनपद के किसान प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बना सकते हैं। उन्होंने किसानों को विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के दौरान प्रबंधक सुमित दुर्गा पाल, भास्कर कुमार और तन्मय कृष्णा ने भी उपस्थित किसानों को संबोधित किया। इस दौरान किसानों को प्राकृतिक खेती के सफल उदाहरणों (सक्सेस स्टोरीज) एवं इससे जुड़ी लाभकारी सरकारी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई।अंत में उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती के प्रति भारी उत्साह व्यक्त किया तथा इसे अपने खेतों में व्यावहारिक रूप से अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को आत्मनिर्भर, पर्यावरण-अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों की ओर अग्रसर करना था। इस दौरान क्षेत्र के तमाम प्रगतिशील किसान और ग्रामीण मौजूद रहे।

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