बाराबंकी में ‘घुन’ का आतंक:
मच्छरदानी भी फेल, आंखों में घुस रहे दुर्गंधयुक्त कीड़े; FCI गोदाम बना मुसीबत की जड़
शाम ढलते ही देवा रोड पर दुपहिया चालकों का थमता है चक्का, 20 मिनट तक साफ करनी पड़ती हैं आंखें...
महंगी कीटनाशक दवाओं के बजट में ‘घोटाले’ के कारण मरे नहीं, बल्कि हवा में उड़ रहे हैं लाखों घुन
खाने की थाली से लेकर दीवारों तक कब्जा; शिवसेना (यूबीटी) ने दी FCI डिपो ठप करने की चेतावनी
कथनी_करनी_न्यूज
बाराबंकी। जनपद के सोमैया नगर और ढकौली सहित आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों में इन दिनों एक बेहद अनोखी और खतरनाक आफत ने पैर पसार लिए हैं। यह आफत कोई बड़ी बीमारी या बाढ़ नहीं, बल्कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों से उड़ने वाले करोड़ों ‘घुन’ (अनाज के कीड़े) हैं। इस समस्या ने हजारों ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि आज पीड़ित ग्रामीणों ने शिवसेना (यूबीटी) के प्रदेश महासचिव मनोज मिश्र ‘विद्रोही’ के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और एक ज्ञापन सौंपा।
खतरनाक क्यों? मच्छरदानी को भेद रहे घुन, आंखों में जा रहा केमिकल
आमतौर पर घुन अनाज की बोरियों तक सीमित रहते हैं, लेकिन यहाँ की समस्या बेहद अनोखी और जानलेवा बन चुकी है। शिवसेना नेता मनोज मिश्र विद्रोही ने बताया कि शाम होते ही ये महीन घुन आसमान में काले बादलों की तरह छा जाते हैं। अनोखा रिहाइशी हमला: ये कीड़े इतने बारीक हैं कि रात को सोते समय मच्छरदानी के छेदों को पार करके अंदर घुस जाते हैं। लोग चैन से सो भी नहीं पा रहे हैं। जहरीला सफर: देवा रोड पर शाम के समय दुपहिया वाहन चलाना किसी खतरे से खाली नहीं है। रसायन और तीव्र दुर्गंध से युक्त ये घुन सीधे चालकों की आंखों में समा जाते हैं। इसके कारण वाहन चालक सड़क किनारे गाड़ियां रोककर 15-20 मिनट तक आंखें धोने को मजबूर होते हैं, जिससे बड़े हादसों का डर बना हुआ है। भोजन पर कब्जा: घरों के भीतर खाने की थाली से लेकर पीने के पानी और दीवारों पर हर जगह सिर्फ घुन ही घुन रेंगते नजर आ रहे हैं।
भ्रष्टाचार का ‘अनोखा’ साइड इफेक्ट: मरने के बजाय उड़ रहे कीड़े
इस खतरनाक स्थिति के पीछे भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही और भ्रष्टाचार सामने आ रहा है। नियमों के मुताबिक, गोदामों में रखे गेहूं और चावल को सुरक्षित रखने के लिए बेहद महंगी कीटनाशक रसायनों का छिड़काव होना चाहिए। आरोप है कि इस बजट को हड़पने के लिए अधिकारी और गोदाम इंचार्ज अमानक और बेहद कम मात्रा में दवा डालते हैं। इस कम तीव्रता वाली दवा के असर से घुन मरते नहीं हैं, बल्कि सुध-बुध खोकर हवा में उड़ने लगते हैं और आस-पास की घनी आबादी पर हमला बोल देते हैं।
शिकायत पर ‘नो एंट्री’, अब आर-पार की लड़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि जब वे इस भयानक समस्या की शिकायत लेकर FCI डिपो जाते हैं, तो वहां के सुरक्षाकर्मी उन्हें गेट से ही भगा देते हैं। अधिकारियों के इस तानाशाही और भ्रष्ट रवैये पर आक्रोश जताते हुए शिवसेना नेता मनोज मिश्र विद्रोही ने एफसीआई प्रशासन को सीधी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि तत्काल मानक के अनुसार दवाओं का छिड़काव कर घुन की समस्या को खत्म नहीं किया गया, तो वे ग्रामीणों के साथ खाद्य निगम डिपो के मुख्य प्रवेश द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेंगे।
इस दौरान मुख्य रूप से हरिओम शुक्ल, नवनीत शर्मा, विशाल मिश्र, किशोर मिश्र ननकऊ, विवेक मिश्रा सहित भारी संख्या में त्रस्त ग्रामीण उपस्थित रहे।








