बी० पैक्स सिदवाही में ₹15 लाख के गबन का आरोप, 6 महीने से खाद को तरस रहे किसान

बी० पैक्स सिदवाही में ₹15 लाख के गबन का आरोप, 6 महीने से खाद को तरस रहे किसान

अपर जिला सहकारी अधिकारी कार्यालय के बाबू पर भी दोषी सचिव को बचाने और सभापति पर दबाव बनाने का संगीन आरोप।

 

फरवरी 2026 से नहीं बंटी खाद, शिकायतकर्ता नें एसडीएम से गुहार लगा कर दी आंदोलन की चेतावनी 

 

कथनी_करनी_न्यूज
बाराबंकी। विकास खंड देवा के अंतर्गत आने वाली सहकारी समिति ‘बी० पैक्स सिदवाही’ में भ्रष्टाचार और तानाशाही का एक बड़ा मामला सामने आया है। समिति के सचिव सियाराम पर ₹15 लाख के सरकारी धन के गबन और पिछले छह महीनों से किसानों को खाद (उर्वरक) न देने का गंभीर आरोप लगा है। इस अव्यवस्था से नाराज क्षेत्र के सैकड़ों पीड़ित किसानों ने उपजिलाधिकारी (SDM) को शिकायती पत्र सौंपकर दोषी सचिव के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और तत्काल खाद वितरण शुरू कराने की मांग की है।

दबाव के बाद खाते में जमा हुई रकम, पर कार्रवाई सिफर

किसानों द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, सचिव सियाराम ने समिति के ₹15 लाख का व्यक्तिगत लाभ के लिए दुरुपयोग और गबन किया था। मामले की भनक लगते ही सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) देवा, शाखा प्रबंधक (कस्बा देवा) और समिति के सभापति ने कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों और सभापति के भारी दबाव के बाद किसी तरह यह सरकारी धनराशि वापस समिति के खाते में जमा कराई जा सकी। लेकिन इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता के बावजूद दोषी सचिव पर अब तक कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।

फरवरी 2026 से बंद है खाद का वितरण, फसलें बर्बाद

ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे विवाद के कारण फरवरी 2026 से लेकर अब तक क्षेत्र के किसानों को एक बोरी खाद भी नसीब नहीं हुई है। खाद न मिलने के कारण किसानों की खेती पिछड़ रही है और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का कहना है कि सचिव समिति से अक्सर नदारद रहते हैं। नियमानुसार कार्य न करना और उच्च अधिकारियों के आदेशों की धज्जियां उड़ाना उनकी दिनचर्या बन चुका है।

सहकारिता विभाग के बाबू पर संरक्षण देने का आरोप

मामले में नया मोड़ तब आया जब किसानों ने नवाबगंज स्थित अपर जिला सहकारी अधिकारी कार्यालय में जाकर इस संबंध में वार्ता की। आरोप है कि वहां तैनात भरथ नाथ यादव नामक कर्मचारी नें दोषी सचिव सियाराम के खिलाफ कार्रवाई रोकने के लिए समिति के सभापति पर कई बार अनुचित दबाव बनाया गया। किसानों का कहना है कि विभाग के कुछ बड़े अधिकारियों और बाबुओं के संरक्षण के कारण ही सचिव के हौसले बुलंद हैं और बार-बार शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

सरकार को बदनाम करने की साजिश का अंदेशा

शिकायतकर्ता मनीष मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि समिति में जानबूझकर विवाद खड़ा करके किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों का मानना है कि इसके पीछे सचिव की मंशा किसान-हितैषी सरकार की छवि को धूमिल करने की है, ताकि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में सरकार को राजनीतिक नुकसान पहुँचाया जा सके।

आंदोलन की चेतावनी

शिकायतकर्ता मनीष मेहरोत्रा ने उपजिलाधिकारी से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। किसानों ने साफ कहा है कि यदि जल्द ही दोषी सचिव के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और किसानों को तुरंत खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो क्षेत्र के समस्त किसान तहसील मुख्यालय पर उग्र आंदोलन और धरना प्रदर्शन के लिए विवश होंगे।

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