डीपीआरओ के चर्चित तबादला काण्ड के पीछे क्या सनसनीखेज राज

डीपीआरओ के चर्चित तबादला काण्ड के पीछे क्या सनसनीखेज राज

सीएम से बाराबंकी भाजपा प्रतिनिधि मण्डल की शिष्टाचार भेंट से क्या…भ्रष्टाचार मुक्त होगा जिला

 

कथनी_करनी_न्यूज
बाराबंकी। जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय के खिलाफ दो वर्षो से त्रस्त प्रधान और विभागीय कर्मियों में रोष का माहौल था। यहां के संविदा कर्मी अवैध वसूली और सरकारी अभिलेखो के हेर में फेर में लिप्त होने की शिकायतो से प्रदेश सरकार की छवि धुमिल होनें से जनप्रतिनिधियों को आमजनमानस के सवालो का जवाब देना भारी पड़ रहा था। जिसके बाद डीपीआरओ का तबादला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बता दे कि जिला पंचायतराज अधिकारी के पद पर जिले की दो वर्षो तक बागडोर सँभालने वाले नितेश भोंडले का चर्चित तबादला बड़ी राजनीतिक गतिविधि में शुमार हुआ है। राज्यमंत्री सतीश चन्द्र शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्षा को पीड़ितों से लगातार मिल रही शिकायतो की लम्बी फेहरिस्त तैयार हो चुकी थी। जिसके बाद बीती 31 मई को भाजपा जिलाध्यक्ष भुल्लन वर्मा के नेतृत्व में एमएलसी अंगद सिंह, जिला पंचायत अध्यक्षा राजरानी रावत, हैदरगढ़ विधायक दिनेश रावत और कुर्सी विधायक साकेन्द्र वर्मा नें मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की। मामले की गंभीरता के फलस्वरूप अनु सचिव नें पंचायतीराज निदेशक को पत्र भेजकर सात दिनों में नितेश भोंडले की जाँच के आदेश जारी कर दिए।
नितेश भोंडले को बीती 26 मई को जिला पंचायत राज अधिकारी पद से मुक्त करके प्रदेश मुख्यालय सम्बद्ध किया गया था, जिसके बाद 30 मई को पुनः जिला पंचायतराज पद पर नितेश भोंडले को मिली तैनाती से जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई। गंभीर आरोपों में संविदा कर्मियों के वसूली और धांधली करने पर कोई कार्रवाई ना करना, सफाई कर्मियों व ईमानदार स्टॉफ को तरह-तरह से प्रताड़ित करना, स्वच्छ भारत मिशन, अंत्येष्टि स्थल, एसएलडब्लूएम, पंचायत भवन निर्माण में नोटिस भेजकर वसूली करने और विभिन्न खरीदारियों में भ्रष्टाचार किए जाने के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बाराबंकी भाजपा प्रतिनिधि मण्डल नें विस्तार से अवगत कराया था।

भोंडले के संरक्षण में पनपे चहेते, नापसंद पर बरपा कहर

 

जिला पंचायतराज अधिकारी कार्यालय में तैनात कुछ भ्रष्ट संविदा कर्मियों का सरकारी दस्तावेजों में दखल और शिकायती गैंग से साँठ-गांठ उजागर होने के बावजूद तत्कालीन जिला पंचायतराज अधिकारी रहे नितेश भोंडले का उन कार्रवाई ना करना उनके संरक्षण और खुली छूट की तरफ ईशारा करता है। वही नितेश भोंडले पर कार्रवाई की तलवार लटकने के बावजूद से भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे संविदा कर्मियों का कोई कार्रवाई ना होने से उनके हौसले बुलंद है। कार्यालय के भ्रस्ट स्टॉफ पर कार्रवाई कब होंगी, आमजन मानस को इसका बेसब्री से इंतजार है।

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