रमताराम चतुर्भुज मंदिर की 1200 बीघा जमीन घोटाले का सनसनीखेज मामला, डीएम से शिकायत

रमताराम चतुर्भुज मंदिर की 1200 बीघा जमीन घोटाले का सनसनीखेज मामला, डीएम से शिकायत

स्कूल की मान्यता रद्द कराने और खुर्द-बुर्द हुई जमीन को मंदिर को वापस दिलाने को लेकर डीएम को सौंपा ज्ञापन

कथनी_करनी_न्यूज़
बाराबंकी। जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में लाखो हिन्दुओ की आस्था के केंद्र माने जाने वाले रमता राम चतुर्भुज मंदिर की बेशकीमती जमीन को वापस दिलाने को लेकर बाबा कमल दास के साथ हिन्दू नेताओं नें डीएम ईशान प्रताप सिंह को शिकायती पत्र देकर मंदिर की जमीनों को मंदिर की ट्रस्ट बनाकर उसमें शामिल किए जाने की मांग की है।
शिकायत पत्र के माध्यम से मंदिर की जमीन अवैध तरीके से लखनऊ के न्यू हैदराबाद निवासी डॉ. सैय्यद अहमद अरशद और सैय्यद हसन अकबर के हाथों बेची गई थी। इस जमीन पर 2013 में मदरसा बनाए जाने के बाद यूपी बेसिक शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेकर दार-अल-अकरम पब्लिक स्कूल, चचेरुआ जहांगीराबाद शुरू किया, जो अपनी गतिविधियों को लेकर क्षेत्र में चर्चित है।

मंदिर की जमीन पर मैरिज लॉन

 

बाबा कमल दास के नेतृत्व में राधे दास, मनोज श्रीवास्तव, हिन्दू जागरण मंच अवध प्रान्त अध्यक्ष, शिवसेना (ठाकरे) प्रदेश महासचिव मनोज विद्रोही, कृष्ण लाल रावत, समेत तमाम लोगो नें चतुर्भुज बाबा मंदिर की जमीन पर निर्माणाधीन मैरिज लॉन के खिलाफ डीएम को शिकायत करके कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में 2019 में मंदिर से जुड़े स्वयंभू अध्यक्ष मंदिर कमेटी आंनद मोहन उर्फ़ कुलदीप वर्मा पर मंदिर की जमीन को खुर्द-बुर्द करने के आरोप लगाते हुए सनसनीखेज खुलासा किया है। शिकायत में कुलदीप वर्मा नें फूल सिंह दास व उनके परिजनों से मिलकर मंदिर की जमीन को खासा नुकसान पहुंचाया गया है।

फर्जी बाबाओ के विरोध करने वालों की हुई हत्या

लाखो हिंदुओ की अस्था के केंद्र रमता राम मंदिर की 1200 बीघा से अधिक जमीन को तथाकथित बाबाओ नें राजस्व कर्मियों के सहयोग से बेचने का काम किया। जिसने भी फर्जी बाबाओ का विरोध किया उनको मौत के घाट उतार दिया गया। मंदिर की जमीन बेचने की शुरुआत बाबा जगन्नाथ दास के समय हुई। जगन्नाथ दास के बाद मंदिर की जमीन पर ट्रैक्टर चलाने वाले मजदूर फूल सिंह यादव निवासी चचेरुआ मंदिर का महंत बननें के बाद मंदिर की सार्वजनिक जमीन बेची। उसने यहां की जमीनो को अपनी पत्नी, बच्चो, भाइयों और रिश्तेदारों के नाम किया। जिसके बाद इन सभी नें जमीन का बैंक से लोन लेकर प्लाटिंग करके मंदिर की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

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