बेईमानो नें ढूंढा आपदा में अवसर, वस्तुओ का बढ़ाया रेट

बेईमानो नें ढूंढा आपदा में अवसर, कई वस्तुओ का बढ़ाया रेट

 

रोजमर्रा की वस्तुओं में बढ़े दामों से त्राहि-त्राहि कर रही जनता

 

कथनी_करनी न्यूज़
बाराबंकी। रोजामर्रा से जुड़ी खाने पीने की कई वस्तुओ के बढ़े दामों से आमजन की गाढ़ी कमाई पर भारी असर देखने को मिल रहा है। फरवरी से लगातर बढ़ रहे वस्तुओ के दाम आमजन के लिए परेशानी का सबब बन चुके है। बेवजह की महंगाई से जुड़े सवालों का जवाब मिलना तो दूर कोई निर्धारित मूल्य से अधिक पर चल रही बिक्री पर कोई कर्रवाई नहीं किए जाने से जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है।
हाल फिलहाल में गैस और ईधन की कमी की अफवाह फैली हो या तम्बाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ना हो। कोई ना कोई वजह या बहाने से बाजार में रेट बढ़ाए जाने का खेल चलता रहा है, समस्या समाप्त होने के बाद जब रेट घटते है उसके बावजूद दुकानदार और कम्पनियां ग्राहक से बढ़ा हुआ मूल्य ही वसूलती है। ये सिलिसला बादस्तूर जारी है इस पर बाजार से क्या निचोड़ निकला जानकारी देने वाले किसी का नाम लिए बिना आपको अवगत कराते है।
पहले बात करते है बाजार में धड़ल्ले से प्रिंट रेट से अधिक मूल्य पर बिक्री किए जा रहे तम्बाकू उत्पादों की। जिनमें पान मसाला (गुटखा) और सिगरेट जैसे उत्पादों पर एक फरवरी से जीएसटी बढ़ा कर 40 प्रतिशत कर दिया गया था। नई सेन्ट्रल एक्साइज ड्यूटी और हेल्थ सेस के कारण सिगरेट व अन्य तम्बाकू उत्पाद महंगे हो गए थे। नया प्रिंट आने से पहले ही जनवरी महीने से ऐसे उत्पादों की कालाबाजारी शुरू हो चुकी थी। फरवरी में नया प्रिंट बाजार में आने के बाद अब मार्च महीने का अंतिम समय है। बाजार में सिगरेट और गुटखा उत्पादों की भारी कमी बताई जा रही है जिसके चलते काला-बाजारी चरम पर है। उदाहरण के तौर पर पांच रूपये प्रिंट का माल आठ रूपये का बिक्री किए जाने के बावजूद बाजार में उसकी शार्टेज है। ग्राहक अपने पसंदीदा ब्रांड के लिए भटकने के साथ विकल्प भी तलाश रहा है, लेकिन ठगी उसका पीछा नहीं छोड़ रही।
अब बात करते है कुछ अन्य रोजमर्रा से जुड़ी खरीदारी की। गैस सिलेंडर की काला-बाजारी पर कुछ हद तक शिकंजा कसा गया तो कई खाद्य वस्तुओं के दामों में बढ़ोत्तरी हो गई। बाजार में 10 रूपये का बिकने वाला समोसा, खस्ता और कचौड़ी कई दुकानों पर 15 रुपये तक बेचा जा रहा है। होली के समय से दुग्ध उत्पाद जैसे दही, घी, पनीर, मलाई और मिष्ठान पर भी मनमाने दाम किए गए, जिनमें असमानता है। एक सप्ताह पहले तक एक कपड़े की धुलाई 15 रूपये थी बढ़ा कर 20 रूपये कर दिए जाने से लोगो की जेब ढीली हो रही है। बच्चे, गृहणी ही नहीं मजदूर पेशा भी परेशान है। लोगो का मानना है सरकार को काला-बाजारी और कई वस्तुओ पर मनमाने दाम वसूले जाने के खिलाफ रास्ता निकाल कर आमजन को राहत पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। लेकिन सवाल ये उठता है कि जैसे कपड़े की धुलाई का कोई रेट निर्धारित नहीं है, तो समोसे और पकौड़ी का भी कोई मूल्य निर्धारित नहीं है। इस पर कैसे लगाम लगाई जा सकेगी।

 

टैक्स चोरी पर कसी लगाम तो बढ़ाए दाम

 

गुटखा और सिगरेट बनाने वाली कम्पनियां मशीनों के जरिये अपने माल का उत्पादन करती है। इन मशीनों का रजिस्ट्रेशन होता है जो इनसे हुए उत्पादन के बाद बिक्री पर आया टैक्स सरकार को दिया जाता है। लेकिन ये कम्पनियां ज्यादा मशीने लगाकर कम मशीन रजिस्टर्ड कराती है और बिना रजिस्टर्ड मशीनों का माल पीछे से रास्ते से बाजार में कट में बेच कर मोटा मुनाफा कमाने के साथ टैक्स की चोरी करती है। सरकार की तरफ से सख्ती किए जाने के बाद कैमरो की निगरानी में उत्पादन प्रक्रिया चल रही है। इस वजह से नंबर एक में चलने वाली मशीने पूरी आपूर्ति करने में असमर्थ हो गई क्योंकि दो मशीने नंबर एक में चलती थी, तो आठ मशीनें चोरी से।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top