विभाग में छुपे आस्तीन के सांप, ब्लैकमेलिंग गिरोह के साथ
फर्जी शिकायतो की बढ़ती तादात से प्रभावित हो रहे सरकारी कार्य
कथनी_करनी न्यूज़ पार्ट-1
बाराबंकी। केंद्र और प्रदेश सरकार की विभागों से मंशा है कि लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए विभागो के माध्यम से नागरिकों की समस्याओ को दूर करके उन्हें देश के विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। वर्तमान समय में विभागीय शिकायतों की बढ़ती तादात से विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे है, जो सरकार की मंशा में रोड़ा अटकाने का काम कर रहे है
सरकार द्वारा जनहित में नागरिकों की समस्याओ के समाधान के लिए, थाना, तहसील, जिला स्तर के अधिकारियो से लेकर अनेक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर आमजन की समस्याओ का निस्तारण करने की व्यवस्था की है। ये सभी माध्यम पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम है। शिकायती प्लेटफार्म पर जानकारी प्राप्त करने से लेकर आम नागरिक न्याय प्राप्त करने के साथ, अपने अधिकारो की जानकारी भी प्राप्त कर सकता है। वर्तमान समय में मुख्यमंत्री का आईजीआरएस पोर्टल हो या ‘सूचना का अधिकार’ कार्यालय यहां विभागीय शिकायतों की बढ़ती तादात अनेक सवाल खड़े कर रही है। जिसका कारण विभागों से दस्तावेज गायब होना या विभागीय साँठगांठ से शिकायतो की बढ़ती वजह बन कर सामने आ रहा है। बढ़ती शिकायते विभाग के जरूरी कार्यों में रूकावट पैदा करने के साथ विभागीय गोपनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह खड़े कर रही है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों और शिकायत करने वाली पार्टी तक ही सीमित रहते है, जबकि कड़ी कार्रवाई बनती है। अगर विभाग से दस्तावेज चोरी नहीं हुए तो शिकायतकर्ता को कैसे प्राप्त हुए, किसने उपलब्ध कराया ऐसे सवाल यक्ष प्रश्न बन चुके है। अक्सर देखा जाता है कि विभागीय साँठ-गांठ से ब्लैकमेंलिंग करने वालों को गोपनीय कागजात उपलब्ध कराने में अंदर का स्टॉफ लिप्त पाया जाता है। विभागो ने छुपे आस्तीन के साँपो के जरिये ब्लैकमेलिंग करने वाले गिरोह भी फल-फूल रहे है। ऐसे गिरोहो का एक सूत्रीय गोरखधंधा है कि एक-दूसरे के विभागीय दुश्मन हो या सरकार के विरुद्ध कार्य करने वालो से तालमेल बनाकर उनसे विभागीय दस्तावेज हासिल करके शिकायत करके अपना उल्लू सीधा करना। ऐसी शिकायत जो विभागीय दस्तावेजों के आधार पर की गई है, उसकी जानकारी करना विभाग के जिम्मेदारो की जिम्मेदारी है, उनके विभाग के अंदर से दस्तावेज बाहर कैसे गया..? वही सरकार की भी जिम्मेदारी है, की विभागो के गोपनीय दस्तावेजाे के आधार पर शिकायत करने वाला गिरोह, क्या ऐसे कार्यों में ही लिप्त है।
शिकायतकर्ता पर भी लागू होते कानून
जानकर ने बताया कि शिकायतों का भी एक दायरा होता है और शिकायतकर्ता भी कानून के दायरे में आता है। देखा जा रहा है कि शिकायत करने वाले के पास विभाग के गोपनीय दस्तावेज चोरी होकर पहुंचने की दशा में जिम्मेदार अधिकारी एफआईआर कराने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए। सम्बन्धित अधिकारी को विभाग की गोपनीयता को कायम रखने के लिए आस्तीन के सांपो को ढूंढ़ कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करना ही उचित विकल्प होगा।
जुगाड़ू कर्मचारी विभाग के लिए घातक
अनेक ऐसे विभाग है जहाँ निचले स्तर के कुछ कर्मचारी होते है जिनके पास विभाग की अंदरूनी जानकारियों का संग्रह होता है। इनमे से कुछ ऐसे तत्व भी शामिल होते है जो अयोग्य होने के बावजूद जुगाड़ लगाकर कमाऊ पदों को हथिया लेते है, जो अपने निजी हितो के लिए विभागीय गोपनीयता भंग करने से परहेज नहीं करते। ऐसे तत्व विभाग के लिए घातक साबित हो रहे है।
क्रमशः


