बाराबंकी में आजीविका मिशन ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर, 52 हजार महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
कथनी_करनी_न्यूज
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आया है। कभी घर के घूंघट और चौके-चूल्हे तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होकर अपने परिवारों का संबल बन रही हैं। जिले में चल रहे महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता की गूंज अब राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देने लगी है।
स्वतः रोजगार आयुक्त सुनील कुमार कौशल नें विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में महिला सशक्तिकरण का एक विशाल नेटवर्क खड़ा हो चुका है। वर्तमान में बाराबंकी के विभिन्न विकास खंडों में 21 हजार से अधिक महिला समूह सक्रिय हैं, जिनसे लगभग ढाई लाख महिलाएं सीधे जुड़ी हुई हैं। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 163 कैडर जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। वहीं, क्लस्टर प्रबंधन को मजबूती देने के लिए हर ब्लॉक में चार संकुल स्तरीय संगठन बनाए गए हैं, जो महिलाओं को लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं ने पारंपरिक ढर्रे से हटकर काम करना शुरू किया है। आज जिले की ग्रामीण महिलाएं 50 से अधिक तरह के कार्यों से जुड़ी हैं। इनमें कृषि, जैविक खाद निर्माण, सिलाई-कढ़ाई, डेयरी उत्पाद और डिजिटल सेवाएं शामिल हैं। इस वित्तीय आजादी का नतीजा यह है कि जिले की 52 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
देश के लिए मिसाल बनीं विद्युत सखी राजश्री शुक्ला
बाराबंकी की इस सफलता की सबसे चमकती हुई मिसाल रामनगर विकास खंड की रहने वाली विद्युत सखी राजश्री शुक्ला हैं। राजश्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर जाकर न सिर्फ बिजली बिल जमा करने के काम को आसान बनाया, बल्कि डिजिटल भुगतान को लेकर ग्रामीण महिलाओं में जागरूकता पैदा की। उनके इस उत्कृष्ट और अनुकरणीय कार्य के लिए भारत सरकार उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित कर चुकी है। राजश्री की यह उपलब्धि जिले की लाखों महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम








