हैदरगढ़ में चीख-पुकार मैरिज हॉल की ढहती छत के साथ दफन हो गए मजदूर के सपने, एक की मौत, 10 जख्मी

हैदरगढ़ में चीख-पुकार

मैरिज हॉल की ढहती छत के साथ दफन हो गए मजदूर के सपने, एक की मौत, 10 जख्मी

 

कथनी_करनी न्यूज
हैदरगढ़ (बाराबंकी)। शनिवार की ढलती शाम हैदरगढ़ के लिए एक ऐसी काली रात लेकर आई, जिसकी गूंज से पूरा इलाका दहल उठा। लखनऊ-सुल्तानपुर हाईवे के किनारे उपनिबंधक कार्यालय के सामने बन रहे एक मैरिज हॉल में दिनभर हंसी-मजाक और मेहनत के साथ छत की ढलाई चल रही थी। काम अपने अंतिम चरण में था, मजदूर और मिस्त्री अपनी दिनभर की मजदूरी समेटकर घर लौटने की तैयारी में थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल एक भयानक चीख-पुकार सब कुछ मलबे में तब्दील कर देगी।
लगभग 3,000 स्क्वायर फीट के हिस्से में स्लैब डालने का काम चल रहा था। तभी अचानक शाम करीब 6:30 बजे शटरिंग के नीचे लगी कमजोर बल्लियां भरभराकर टूट गईं। पलक झपकते ही कंक्रीट और लोहे का भारी-भरकम जाल नीचे काम कर रहे मजदूरों पर काल बनकर गिर पड़ा। जो मजदूर छत के ऊपर थे वे छिटककर दूर जा गिरे, जबकि नीचे काम कर रहे सात लोग मलबे के उस गहरे ढेर में दफन हो गए। हादसा होते ही मौके पर हड़कंप मच गया और भारी भीड़ जमा हो गई। आनन-फानन में पुलिस और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। जेसीबी और हाइड्रा मशीनों की मदद से मलबे को हटाने का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। हर बीतते मिनट के साथ अपनों की सलामती के लिए दुआएं मांग रहे परिजनों की धड़कनें बढ़ रही थीं। मलबे के नीचे से घायलों को निकालने का सिलसिला शुरू हुआ, जिन्हें तुरंत नजदीकी सीएचसी पहुंचाया गया।

नौशाद की थमी सांसें, परिवार में मचा मातम

इस ढाई घंटे लंबे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के आखिरी पलों में जब लोनी कटरा के बद्दा पुर (तेजवापुर) निवासी नौशाद (45 वर्ष) को मलबे से बाहर निकाला गया, तो उम्मीदें टूट चुकी थीं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। नौशाद की मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घर के कमाऊ सदस्य के इस तरह चले जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे घायल

इस हादसे में गंभीर रूप से घायल गौरिया पुरवा के रामलखन (46) और धौरहरा के प्रदीप कुमार (28) को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रेफर किया गया है। वहीं, भाईलाल, रामसुख, जमुना प्रसाद, मुकेश कुमार, देशराज, सर्वेश और रामहेत का इलाज सीएचसी हैदरगढ़ में चल रहा है। जिसके बाद चारो तरफ शोक संवेदना प्रकट करने का दौर शुरू हो गया है।
यह हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर बड़े सवाल खड़े कर गया है।

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