पर्यावरण के लिए वरदान झोलामैन का निमंत्रण पत्र

पर्यावरण संरक्षण में नई पहल, कपड़े पर छपा वैवाहिक निमंत्रण पत्र

पारम्परिक कागज की जगह सूती कपडे पर छपवाया निमंत्रण पत्र

कथनी करनी न्यूज़
बाराबंकी। पर्यावरण संरक्षण के जुनून ने अपने भतीजे के विवाह में पारम्परिक कागज के बने निमंत्रण पत्रों के स्थान पर सूती कपड़े की रुमाल पर निमंत्रण पत्र छपवाने का मुझे विचार आया। उक्त बात झोलामैन के नाम से विख्यात अजीत प्रताप सिंह ने कही। उन्होंने पत्रकारों से रूबरू होते हुए बताया कि बाराबंकी से लेकर लखनऊ की स्थानीय अमीनाबाद मार्केट या आसपास कोई भी इस तरह का निमंत्रण पत्र छापने के लिए नहीं मिला। जो मिला भी उसने बताया कि वेलवेट के कपड़े पर छाप सकते हैं, लेकिन इसकी स्याही परमानेंट रहेगी जो की रियूज तो कतई नहीं हो पायेगा। इसलिए इंटरनेट पर काफी खोजबीन के उपरांत पूरे देश में एकमात्र पुणे, महाराष्ट्र में एक ऐसा प्रिंटिंग प्रेस मिला जो कपडे की रुमाल पर निमंत्रण पत्र छापने को तैयार हुआ।
इसकी छपाई की एक और विशेषता है कि इसके प्रिंट की स्याही इसे दो बार धोने के बाद एकदम धुलकर साफ हो जायेगी। जिसके बाद हम इसका रुमाल के रूप को सालों साल प्रयोग कर सकते हैं। यह किसी वस्तु के रियूज का सर्वोत्तम उदाहरण है।
इस नवाचार या नवप्रयोग के कई लाभ इस प्रकार है।
चूँकि कागज पेडों को काटकर ही बनता है इस प्रकार पेड़ों की सुरक्षा होगी।
लगभग सभी निमंत्रण पत्रों पर पवित्र देवी देवताओं के चित्र और धार्मिक चिन्ह बने होते हैं साथ ही वेदों से लिए गए मंत्र इत्यादि लिखे जाते हैं। हम सबके पूर्वजों से लेकर परिवार जनों के नाम भी अंकित होते हैं। क्योंकि कागज के निमंत्रण पत्र रीसायकल नहीं हो पाते हैं।इसलिए इनको कबाडी भी नहीं लेता है और अंततः अधिकतर कूड़े में फेक जाते हैं, जहां पर इनका हर तरह से अपमान होता है।
इस प्रकार इस नए प्रयोग से जहां हम पेड़ों के काटने की संख्या में कमी कर सकते हैं। वही अपने धार्मिक प्रतीकों का सम्मान भी कर सकते हैं और 2 धुलाई के बाद बढ़िया कॉटन का रुमाल सालों साल हमारे काम आ सकता है। पूरे देश खासकर उत्तर भारत के लिए यह एक नई नवीन प्रयोग है, जिसे आज सबके अपनाये जाने की आवश्यकता है।

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