बंदियों के अधिकारों को लेकर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
प्रत्येक बंदी को जेल में भी मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार है: श्रीकृष्ण चन्द्र सिंह
कथनी_करनी न्यूज़
बाराबंकी। विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में माह दिसम्बर 2025 के प्लान आफ एक्शन के अन्तर्गत जिला कारागार में बंदियों के अधिकार एवं प्ली बार्गेनिंग विषय पर विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त राजेन्द्र सिंह, जेलर, डिप्टी जेलर, वार्डन, चिकित्सक, सेवादार के अतिरिक्त महिला व पुरूष बंदी शामिल हुये।
श्रीकृष्ण चन्द्र सिंह अपर जिला जज/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा शिविर में उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुये कहा कि आज हम यहाँ एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए हैं, और वह विषय हैकृ “बंदियों के अधिकार एवं प्ली बार्गेनिंग”। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आप सभी को यह बताना है कि कानून आपको कौन-कौन से अधिकार प्रदान करता है। सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि कारावास का अर्थ अधिकारों का समाप्त हो जाना नहीं है। भारत का संविधान एवं कानून आप सभी को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है। यदि कोई बंदी वकील करने में असमर्थ है, तो उसे निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान की जाती है। बीमार होने पर उचित इलाज, दवाइयाँ एवं चिकित्सकीय सुविधा पाना आपका अधिकार है। निर्धारित नियमों के अंतर्गत अपने परिवारजनों से मुलाकात करना आपका अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक विचाराधीन नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने बताया कि प्ली बार्गेनिंग एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें अभियुक्त अपनी गलती स्वीकार करता है और बदले में उसे कम सजा या शीघ्र निर्णय का लाभ मिल सकता है। यह प्रक्रिया विशेष रूप से उन मामलों में लागू होती है जहाँ अपराध की सजा 07 वर्ष से कम हो। जहाँ अपराध गंभीर या समाज के विरुद्ध अत्यंत घातक न हो। जहाँ मामला विचाराधीन हो। प्ली बार्गेनिंग से बंदियों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं जैसे मुकदमे का शीघ्र निस्तारण, लंबी कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति, कम सजा या केवल अर्थदण्ड, मानसिक तनाव एवं आर्थिक बोझ में कमी, परिवार के पास शीघ्र लौटने का अवसर आदि। यदि कोई बंदी प्ली बार्गेनिंग का लाभ लेना चाहता है, तो वह अपने वकील से संपर्क करे या जेल लीगल एड क्लीनिक अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वैच्छिक होती है, किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाता।
राजेन्द्र सिंह जेलर ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपने विचार व्यक्त किए कि कानून दंड देने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास का भी अवसर देता है। अपने अधिकारों की जानकारी रखना आपको सशक्त बनाता है। यदि जेल में निरूद्ध बंदी कानून की सही जानकारी लेकर आगे बढ़ते हैं, तो निश्चित रूप से बंदी का भविष्य बेहतर हो सकता है। जेल को सुधार गृह के रूप में मानते हुये बंदी को अपने भीतर सुधार लाने का प्रयास करना चाहिये।

